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देश की अर्थव्यस्था में उछाल लाने के लिए देखिए पीएम मोदी ने पांच पिलर्स

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पीएम मोदी ने देश को संबोधित करते वक्त सबसे पहले देशवासियों को नमन किया। उसके बाद उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण से मुकाबला करते हुए दुनिया को 4 महीने से ज्यादा समय बीत गया। इस दौरान तमाम देशों के 42 लाख से ज्यादा लोग करुणा से संक्रमित हुए पौने तीन लाख लोगों से ज्यादा की दुखद मृत्यु हुई है।

पीएम मोदी ने देश की अर्थव्यस्था में उछाल लाने के लिए पांच पिलर्स का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा, ‘आत्मनिर्भर भारत की ये भव्य इमारत, पाँच Pillars पर खड़ी होगी। पहला पिलर Economy एक ऐसी इकॉनॉमी जो Incremental change नहीं बल्कि Quantum Jump लाए।’

दूसरा पिलर Infrastructure एक ऐसा Infrastructureजो आधुनिक भारत की पहचान बने।

तीसरा पिलर है हमारा System यानी व्यवस्था। एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के सपनों को साकार करने वाली Technology Driven व्यवस्थाओं पर आधारित हो।

चौथा पिलर है हमारी आबादी ( Demography) दुनिया की सबसे बड़ी आबादी लोकतंत्र में हमारी Vibrant Demography हमारी ताकत है। आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है।

पाँचवाँ पिलर है Demand है हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई चेन का जो चक्र है, जो ताकत है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है।

भारत जब आत्मनिर्भरता की बात करता है, तो आत्मकेंद्रित व्यवस्था की वकालत नहीं करता। भारत की आत्मनिर्भरता में संसार के सुख, सहयोग और शांति की चिंता होती है। भारत की प्रगति में तो हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है। भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव, विश्व कल्याण पर पड़ता है।

यही हम भारतीयों की संकल्पशक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं, कोई राह मुश्किल नहीं और आज तो चाह भी है, राह भी है।

ये है भारत को आत्मनिर्भर बनाना। आज हमारे पास साधन हैं, हमारे पास सामर्थ्य है, हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरीन टैलेंट है, हम Best Products बनाएंगे, अपनी Quality और बेहतर करेंगे, सप्लाई चेन को और आधुनिक बनाएंगे, ये हम कर सकते हैं और हम जरूर करेंगे।

टीबी हो, कुपोषण हो, पोलियो हो, भारत के अभियान का असर दुनिया पर पड़ता ही है। इंटरनैशनल सोलर अलांयंस ग्लोबल वॉर्मिंग के खिलाफ भारत की दुनिया को सौगात है। इंटरनैशनल योग दिवस की पहल मानव जीवन को तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए भारत का उपहार है।

मैंने अपनी आंखों के सामने कच्छ भूकंप के वे दिन देखे हैं। हर तरफ सिर्फ मलबा ही मलबा। सब कुछ ध्वस्त हो गया था। ऐसा लगता था मानो कच्छ मौत की चादर ओढ़कर सो गया हो। उस समय कोई भी नहीं सोच सकता था कि हालत बदल पाएंगे। लेकिन देखते ही देखते कच्च उठ खड़ा हुआ। कच्छ चल पड़ा। कच्छ बढ़ चला। यही हम भारतीयों की संकल्पशक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं है। कोई राह मुश्किल नहीं है। आज तो चाह भी और राह भी है। यह है भारत को आत्मनिर्भर बनाना। भारत की संकल्पशक्ति ऐसी है कि भारत आत्मनिर्भर बन सकता है।

आत्मनिर्भर भारत की यह इमारत चार पिलर पर खड़ी होगी। पहला पिलर- इकॉनमी। एक ऐसी इकॉनमी जो इंक्रिमेंटल चेंज नहीं क्वांटम जंप लाए। दूसरा पिल-इंफ्रास्ट्रक्चर। ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर जो आधुनिक भारत की पहचान बने। तीसरा पिलर हमारा सिस्टम। ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की नहीं, बल्कि इक्कसवीं सदी के सपनों को साकार करने वाले टेक्नॉलजी ड्रिवन व्यवस्थाओं पर आधारित हो।

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